गुजरात की धरती वैसे तो अपने आप में खास है, लेकिन पावागढ़ माता जी की बात ही कुछ और है। यह जगह सिर्फ़ एक मंदिर या पहाड़ी नहीं है, बल्कि आस्था, रहस्य और इतिहास का ऐसा मेल है जो आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है। जो एक बार यहाँ आता है, वो खाली हाथ नहीं लौटता — ऐसा यहाँ के लोग दिल से मानते हैं।
पावागढ़ माता जी – सिर्फ़ मंदिर नहीं, एक अनुभव
पावागढ़ माता जी का मंदिर पंचमहल जिले में स्थित है और पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी पर विराजमान है। यहाँ माँ को कालिका माता के नाम से पूजा जाता है। कहा जाता है कि यह स्थान शक्ति पीठ है, इसलिए इसकी मान्यता और भी बढ़ जाती है।
जब आप ऊपर चढ़ते हैं, तो रास्ते में ऐसा लगता है जैसे हर सीढ़ी कुछ कहना चाहती हो। हवा में एक अलग ही शांति महसूस होती है।
वो रहस्य जो आज भी लोगों को चौंकाता है
सबसे बड़ा रहस्य यही माना जाता है कि
👉 माँ कालिका की मूर्ति अधूरी है, फिर भी पूर्ण मानी जाती है।
कहते हैं कि यहाँ सती माता का पैर का अंग गिरा था। इसलिए मूर्ति का पूरा रूप नहीं है, लेकिन शक्ति पूरी है। यही बात लोगों को हैरान करती है।
आज भी कई भक्त कहते हैं कि:
कई लोगों की मनोकामनाएँ बिना कहे पूरी हो जाती हैं
माँ से सच्चे मन से माँगो, जवाब ज़रूर मिलता है
पावागढ़ का पौराणिक किस्सा
पुरानी कथाओं के अनुसार, यहाँ पहले ताटिका नाम की राक्षसी का राज था। वह लोगों को बहुत परेशान करती थी। तब माँ काली ने उसका वध किया और इसी पहाड़ी पर विराजमान हो गईं।
तभी से इस जगह को शक्ति का केंद्र माना जाने लगा। गाँवों में आज भी बुज़ुर्ग लोग ये कहानी बड़े भरोसे से सुनाते हैं।
इतिहास भी कम दिलचस्प नहीं
पावागढ़ सिर्फ़ धार्मिक जगह नहीं, बल्कि इतिहास की गवाही भी देता है।
- 13वीं शताब्दी में सुल्तान महमूद बेगड़ा ने यहाँ किला बनवाया
- पहाड़ी पर आज भी पुराने किले, दरवाज़े और दीवारें दिखाई देती हैं
- कभी यह जगह रणनीतिक रूप से बहुत अहम मानी जाती थी
इतिहास और भक्ति — दोनों एक साथ मिलते हैं यहाँ।
पावागढ़ क्यों आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है?
- माँ कालिका के दर्शन
- रहस्यमय वातावरण
- ऊपर से दिखता पूरा इलाका
- इतिहास के निशान
- मन को मिलने वाली शांति
कई लोग कहते हैं कि यहाँ आकर मन अपने आप हल्का हो जाता है।
Ropeway और पैदल यात्रा – दोनों का मज़ा
जो लोग सीढ़ियाँ नहीं चढ़ पाते, उनके लिए Ropeway की सुविधा है।
ऊपर जाते समय नीचे का नज़ारा देखकर दिल खुश हो जाता है।
और जो लोग पैदल जाते हैं, वो कहते हैं:
“थकान तो होती है, लेकिन माँ के नाम से कदम अपने आप चल पड़ते हैं।”
नवरात्रि में पावागढ़ का अलग ही रूप
नवरात्रि के दिनों में पावागढ़ की रौनक देखने लायक होती है।
- लाखों श्रद्धालु
- रात-दिन भक्ति
- हर तरफ़ “जय काली माँ”
कई भक्त तो नंगे पैर ऊपर तक जाते हैं, सिर्फ़ श्रद्धा के भरोसे।
ऊपर और आसपास क्या मिलेगा?
थक जाएँ तो:
- गरम चाय
- भजिया
- नींबू पानी
सादा, देसी और सुकून देने वाला स्वाद।
पावागढ़ जाने का सही समय
- अक्टूबर से मार्च सबसे बढ़िया
- नवरात्रि में भीड़ ज़्यादा होती है
- बारिश में नज़ारा सुंदर, लेकिन संभलकर चलना पड़ता है
कैसे पहुँचे पावागढ़?
ऊपर तक Ropeway या पैदल रास्ता
नज़दीकी शहर: वडोदरा
बस, ट्रेन और टैक्सी आसानी से
जो लोग रहस्य में विश्वास करते हैं,
जो इतिहास से प्यार करते हैं,
और जो मन की शांति चाहते हैं —
उनके लिए पावागढ़ एक बार नहीं, कई बार जाने की जगह है।
Q1 पावागढ़ माता जी से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य क्या माना जाता है?
A: पावागढ़ माता जी से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य यह माना जाता है कि यहाँ माता की मूर्ति अधूरी होते हुए भी पूर्ण शक्ति वाली है। मान्यता है कि यहाँ सती माता का पैर गिरा था, इसलिए यह स्थान शक्ति पीठ के रूप में पूजित है।
Q2
क्या पावागढ़ माता जी को शक्ति पीठ माना जाता है?
A: जी हाँ, पावागढ़ माता जी को शक्ति पीठ माना जाता है। पुराणों के अनुसार यहाँ देवी सती का अंग गिरा था, जिस कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
Q3
पावागढ़ माता जी का मंदिर कहाँ स्थित है?
A: पावागढ़ माता जी का मंदिर गुजरात के पंचमहल जिले में पावागढ़ पहाड़ी की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित है।
Q4
पावागढ़ माता जी जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
A: अक्टूबर से मार्च का समय पावागढ़ माता जी जाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। नवरात्रि में यहाँ विशेष भीड़ रहती है।
Q5
क्या पावागढ़ माता जी तक Ropeway की सुविधा है?
A: हाँ, पावागढ़ माता जी तक पहुँचने के लिए Ropeway की सुविधा उपलब्ध है, जिससे श्रद्धालु आसानी से मंदिर तक पहुँच सकते हैं।
Table of Contents
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- पावागढ़ माता जी से जुड़ा कौन-सा रहस्य आज भी लोगों को चौंकाता है?
- Gamification in Education: How Game-Based Learning Is Transforming Classrooms
Somnath Temple: पुराणिक कथा, रहस्य, इतिहास और महत्व | सोमनाथ मंदिर की पूरी कहानी’
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